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मेरे वतन में कभी रात न हो
March 18, 2017 | Alok Pandey






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अभिनन्दन तिलक करो
आरती थाल सजाओ
रिपु शीष लाल भारती के लाए
जयघोष, शंख बजाओ।

रुदन है उस ओर भयानक
डोल रहा सिंहासन

शरीफों की एक न चलती
मचल रहा दुः शासन

अब डंके की चोट पे सुनलो
हमको ये बतलाना है
समझ ले ए दुश्मन
तुझको ये समझाना है

जो प्रारम्भ हुआ प्रलय तो
पाना होगा
शीष कटेंगे कितने दुश्मन के
बस गिनते जाना होगा।

महाकाल के इस पथ में
अणु-परमाणु की बिसात न होगी
तेरा सूरज छिन जायेगा तुझसे
और-------
मेरे वतन में कभी रात न होगी।

KissaKriti | मेरे वतन में कभी रात न हो
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