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नोंक-झोंक
November 8, 2017 | Sachin Om Gupta






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कुछ भूंख सी लग रही है कुछ बना दो खाने को | टाई की नॉट ढीली करते हुए करन ने कहा |
निशा "अरे खुद बना लो कुछ | मैं कुछ आर्टिकल लिख रही हूँ |
आज एक अख़बार को भेजना है , "अभी- अभी कुछ देर पहले अख़बार के एडिटर रहमत भाई का फ़ोन आया था ,की जल्दी भेजो "
करन ने निशा से कहा की एक कप चाय बना दो फिर लिखती रहना |
बहुत थक गया हूँ आज !!
निशा गुस्से में बोली आप कब नहीं थकते , जब देखो थके हुए से रहते हो !!
मैं अकेली दिन भर दो बातें करने के लिए तरसतीं हूँ , और ये महाराज घर आएंगे तो बस ऐसा नाटक दिखाएंगे जैसे किसी हॉटल में आए हो |
बीबी खाना बनाए ,रोटी बनाए और महाराज जी के मुँह में ठूस दे |
हद हो गयी यार !!
कमाने वाली बीवी होती तो खुद बनाते गरम चाय और अपने हाथों से पिलाते, और फिर मेरा सोना, बाबू वाले गुणगान गाते फिरते |
गाय जैसी बीबी मिल गयी है तो नवाबी झाड़ रहे हो !
अब निशा गुस्से में मुँह बनाते हुए चप्पल पटकते हुए रसोई की तरफ घुस गई ,
चप्पल पट ,पट ,पट ......
कुछ देर बाद !!
लो चाय ! और सुरक लो ,
और कुछ चाहिए तो एक बार बता दो , बार -बार आवाज मत लगाना गला मत फाड़ना |
करन सहमी सी आवाज में हिम्मत जुटा कर पूछा ,
"वैसे किस टॉपिक पर लिख रही हो आर्टिकल बताती जाओ शायद मैं कुछ आयडिया दे दूँ"
निशा ने जोर से कहा ," घर कैसे बने स्वर्ग " इस पर
करन "उफ़ !!
करन को अभी तक कुछ आयडिया नहीं आ रहा , और न ही उसने ज्यादा कुछ सोचने की कोशिश की |




"समाप्त"

धन्यवाद...
(सचिन ओम गुप्ता, चित्रकूट धाम)



KissaKriti | नोंक-झोंक
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