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वेदना
November 16, 2017 | Om Fulara






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न भूखे को रोटी न प्यासे को पानी
कैसी है भारत ये तेरी कहानी
कूड़े के ढेरों में अब भी है बचपन
दर दर भटकती ये तेरी जवानी,
डर डर के जीती है तेरी ये नारी
आंखों में इसके है आज पानी,
रगों में ये बहता लहू जम रहा है
ज्यों सर्दी में जमता है पानी ,
एे मेरी सोने चिड़िया
कैसी ये तेरी कहानी!
रहनुमाओं के मुख से सरस मीठे बोल
आशा की किरण से खुशी देते घोल
लम्बा सफ़र तय करके जो देखा
कभी सच न होती इनकी ये वाणी
कैसी है भारत ये तेरी कहानी!
भटकते भटकते तेरा ये यौवन
बढा जा रहा है अंधियारी गली में
पतित हो रहा है तेरा ये जीवन
जहर भर रहा है हर फ़ूल व कली में
सोई हुई है वीरों की वाणी
कैसी है भारत ये तेरी कहानी
न भूखे को रोटी न प्यासे को पानी
कैसी है भारत ये तेरी कहानी?

KissaKriti | वेदना
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