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कुछ दूर क्षितिज के पार वह
November 16, 2016 | Aman Sood






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कुछ दूर क्षितिज के पार वहां
इक और भी है संसार वहां
नफरत की दीवार नहीं है
हर दिल में है बस प्यार वहां

जहाँ अपने का कोई मोह नहीं है
और तेरे की टोह नहीं है
हर शख्स अकेला है लेकिन
अपनेपन की छोह नहीं है
फूल धरा पर बिखरे हैं सब
ढूंढे नहीं मिलता खार वहां
कुछ दूर क्षितिज.....

जहाँ अंतर-मन है निर्मल-निश्छल
है कल से बेहतर आज और कल
हर लम्हा है अल्फ़ाज़ नया
वक़्त है जैसे एक ग़ज़ल
मुझे जाना था हर बार वहां
मैं जाऊंगा इस बार वहां
मृत्यु भी मिथ्या लगती है
जीवन का है सार वहां

कुछ दूर क्षितिज के पार वहां
इक और भी है संसार वहां
अमन सूद "तन्हा"

KissaKriti | कुछ दूर क्षितिज के पार वह
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