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.पापा ने सिखाया है
July 5, 2017 | Surendra Arora






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" अच्छा छोटी मैं चलना चाहूंगी . लगता है जीजा जी को आने में देर लगेगी ."
" कैसी बाते करती हो दीदी , थोड़ी देर और देख लो , आते ही होंगें ."
" नहीं छोटी . मैं पहले ही काफी लेट हो चुकी हूँ . अकेले तेरे जीजा जी की बात होती तो मैं रूक भी जाती . शाम का वक्त है मम्मी जी अकेले काम में लगी होंगीं . यह मुझे अच्छा नहीं लगता ."
" क्यों जीजा जी डांटते हैं क्या कि घर के काम में मम्मी का हाथ बताया करो ?"
" कैसी बातें कर रही है छोटी . वे भला क्यूँ डांटेगें . क्या उनके डर के मारे मुझे मम्मी जी के बारे में सोचना चाहिए . अम्मा ने तो हमें पाल -पास कर बड़ा किया है पर मम्मी जी ने तो मुझे जिंदगी का वह नायाब तोहफा दिया है जिसकी वजह से मैं पूरी ठसक के साथ कह सकती हुँ कि मुझे अपने घर जाना है ."
" रहने दो न दीदी . क्या हम कुछ भी नहीं ? हमारे बिना हमारे वो अधूरे नही हैं क्या . हम न हो तो घूमते रहेंगें मारे - मारे और शायद मरे - मरे भी . पता नहीं क्यों तुम खुद को इतना कम करके आंकती रहती हो !"
" ऐसा बिलकुल नहीं है छोटी . बात उनकी नहीं , बात मम्मी जी की है . जानती हो उन्होंने अपने बेटे को जन्म देने और पाने के लिए अपने हर इष्ट की कितनी मिन्नते की थी . एक बार नीलेश जब छोटे थे तो उन्हें टायफायड ने जकड़ लिया था , बुखार उतरने का नाम नहीं ले रहा था तब मम्मी जी ने एक ओर जहां सोलह सोमवार रखकर अपने इष्ट से नीलेश की जिंदगी की दुआएं की थीं वहीं दूसरी ओर पिता जी ने शहर के सबसे महंगें अस्पताल की सेवाएं ली थी .
इतना ही नहीं पिता जी तो डाक्टर के आगे गिड़गिड़ा पड़े थे " डाक्टर साहब मैं इस बच्चे के बिना अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकता . इसकी माँ तो इसके बिना एक पल भी नहीं जी सकती . उनका दिया हुआ वही नीलेश अब मेरे इस जीवन की सबसे अमूल्य धरोहर है .तो क्या मुझे उनकी चिंता नहीं करनी चाहिए ? "
" रहने दो दीदी ! ये कौन सी खास बात है ! ऐसा तो सभी माँ - बाप करते हैं . हमारे मम्मी - पापा ने भी तो हमें इसी तरह से बड़ा किया है और अब हमें उनके बेटे को सौप दिया है तो क्या हम सब जगह इन बातों का ढिढोरा पीटते फिरें ? "
" तो वे भी तो इस बात को स्वीकार करते ही हैं और हमारे सुख - दुःख के साथ- साथ हमारे मान - सम्मान की चिंता भी करते हैं . उनकी वजह से जो अलंकरण हमें समाज ने दिए हैं , उसी के बल पर हम कहीं भी अपने आत्म - विश्वास का प्रदर्शन कर पाते हैं वरना तो हर जगह भेड़िये ही पड़े मिलते हैं ."
" रहने दो दीदी . अब जमाना बदल गया है . तुम तो अब भी अठारहवीं सदी को जी रही हो . "
" चलो रहने दिया छोटी पर मेरा फर्ज है कि मैं जितनी चिंता अम्मा की करूँ , उतनी ही चिंता मुझे मम्मी जी की भी करूँ . नीलेश मेरा प्यार हैं और मुझे हर उस चीज से प्यार है जिसे नीलेश प्यार करते हैं . नीलेश अपनी माँ को बहुत प्यार करते हैं इसलिए मैं भी उन्हें बहुत प्यार करती हुँ . नीलेश अच्छे ही इस लिए बन पाए क्योंकि उनकी माँ ने अपनी अच्छाई से उन्हें अच्छा बनाया है और मैं ऐसा कोई काम नहीं करूंगी जो अच्छे लोगो को बुरा लगे . यही तो हमें पापा ने सिखाया है . "
" ऑफ़ हो दीदी ! अब चुप भी करो ."
" लो हो गयी चुप . तेरा मियां अभी भी नहीं आया . मैं तो चली . फिर मिलूंगी ."

KissaKriti | .पापा ने सिखाया है
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