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एक भूल ...........
April 26, 2017 | Yojna Jain






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वो मर चुकी थी पर उसकी आत्मा भटक रही थी........ यकीन नहीं हो रहा था उसे कि उसके साथ ऐसा हो सकता है..........

शायद उस दिन ऐसा ना होता अगर उसने ये भूल न की होती..... सिर्फ अपने बारे में ना सोचा होता..........."Call of Duty" को यूँ ignore न किया होता.....

लीजिये किस्सा कृति की ये प्यारी सी दोस्त अपनी दास्ताँ अपने आप सुना रही है..........
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Part 1:
क्यों आई मैं उस दिन, क्यों निकली घर से बाहर. क्यों क्यों????
काश, काश और काश!
कैसे घर जाऊंगी अब. कोई पहचानेगा भी मेरी पूरी तरह disfigured body को.
हे भगवान्, क्यों मेरे साथ ऐसा हुआ.... सोचा ... पर इतने सारे और लोगों की लाश देखके लगा .... कुछ नहीं....

क्या करु, रुंधा गला, आखों से आंसूं की धार रुक ही नहीं रही. मन करता है जोर से चिल्लाऊँ.... चीखूँ.... पर बेबस, लाचार, सदमे में चुपचाप खड़ी थी. कभी अपनी लाश को देखती, कभी औरों की.........

ये क्या हो गया..??? और मेरे साथ ही क्यों....?????

पर हाँ, अच्छा हुआ... हाँ अच्छा ही तो हुआ... कुछ याद आते ही मैं चहक पड़ी... आह! thank God, ये मेरे साथ हुआ. thank God मैं आई थी आज यहाँ.... पहले तो रोहन और रेयस आने वाले थे न....Oh God, अगर वो आते तो....

आह! ये सोच के बड़ी शांति मिली.

पर अब क्या होगा? कल तो रेयस का fancy dress competetion है, और मैं उसकी dress भी लेके नहीं आ पायी थी...

पर अब तो वो वैसे भी जा नहीं पायेगा... कितनी तैयारी की थी उसने...

और मेरी माँ, मम्मा का क्या होगा... पापा तो टूट ही जायेंगे और रोहन, वो तो पहले भी अपने काम में इतना busy रहते थे,... अब तो पता नहीं क्या करेंगे...

ये सब ख्याल जेहन में आते ही धम से बैठ गयी... अपनी मरी हुई, विभत्स लाश के पास....

चारों तरफ लोग दौड़ भाग रहे थे. असल में सबसे पहले अपने मरने का एहसास तभी हुआ जब लोग मुझे लांघ कर, मुझ पर से गुजर कर ऐसे जा रहे थे जैसे मैं हूँ ही नहीं.... कुछ देर तक तो कुछ समझ नहीं आया.... पर जब समझ आया की मैं अब जिन्दा नहीं... तो क्या.... अब क्या.... वो क्या.... और ये क्या.....

आने वाले कल के सपने कल की आँखों में भरे थे.
और हम अपनी चिता को देखते आज इस ओर खड़े थे.

हा हा हा हा... फिर कुछ सोचा इस आत्मा ने...
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याद आया, कल सुबह जब रोहन से झगड़ रही थी. उसकी बे टाइम ड्यूटी को लेके.. पुलिस की नौकरी छोड़ने को लेके... अरे क्या रखा है इस job में. अपना इतना अच्छा family business छोड़ के... भाइयों को सब देके, हम ऐसे रह रहे हैं यहाँ.....

सोच लिया था बस की रेयस को लेके चली जाऊंगी अब मैं. नहीं रह सकती ऐसे..
5 साल निकाल दिए, बस अब बहुत हो गया... educated हूँ, सुन्दर हूँ, अपना हिस्सा लूंगी, job करूंगी और अलग रहूंगी रेयस को लेके. पैसा नहीं, टाइम नहीं, क्या फायदा ऐसे रिश्ते का.

हमेशा से ही बहुत ambititious थी मैं. जब parents ने एक police inspector से शादी की बात बोली, तो मैंने सोचा.. wow, great... बहुत कुछ मिलेगा जिंदगी में... पर, पर क्या मिला. एक बहुत इमानदार, जाबांज police inspector. अपनी corporate की इतनी अच्छी job छोड़ दी रेयस के होने के बाद.

उसके बाद तो जैसे लाइफ एक कोने में सिमट गई. बस रेयस के चारों तरफ... दिन तो यूँहीं निकल जाते और रातें ....रोहन का इंतज़ार करते सो जाती, तरसती, तड़पती, कोसती, पछताती... हमेशा डर लगा रहता की कब क्या सुनने को मिल जाए ...

अपनी friends से मिलती कभी, पर मेरे showoff nature को अब उनसे मिलना भी रास नहीं आता था. क्या करती दोस्तों से मिलके, showoff करने के लिए न पैसा था, न सुनाने के लिए मजेदार किस्से. रेयस के होने के बाद ये किलस, ये unsatisfaction बढ़ता ही चला गया.

और कल का दिन ख़ास था.... मैंने ठान ली थी की आज तो रोहन को किसी तरह घर पे रोक ही लूंगी... and yes I was successful in convincing him. किसी तरह रिझाके, मना के, अपने जाल में फंसा के, रेयस की कसम देके मैंने रोक ही लिया उसे.

उनका Phone छुपा दिया.

एक message आया हुआ था phone पे, intelligence से... चलते चलते देखा था.. कोई bomb threat का था....

खैर, मुझे शाही पनीर बनानी है आज... पहले रोहन एंड रेयश जाने वाले थे, पर मैंने कहा.... मैं खुद जाके fresh पनीर लेके आऊंगी... और ......

शायद कई जानें बच सकती थीं.................
शायद मेरी भी...............

समाप्त!!!

KissaKriti | एक भूल ...........
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