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बसंत
January 27, 2018 | Deep Chandra Pandey






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स्वागत है ऋतुराज आपका ,
स्वागत अरु अभिनंदन वंदन।
नव किसलय कोमल कलियों में,
नवजीवन का संचार हुआ।
रंग बिरंगे नवल प्रसूनों से,
धरती मां ने श्रृंगार किया।
पीत रंग की ओढ़ चुनरिया,
वसुंधरा का झलका यौवन।।स्वागत।।
रसाल विटप चढ़ काली कोयलिया,
कुहुक कुहुक कर गीत सुनाती।
गुन गुन करती भ्रमरों की टोली,
फूल फूल पर उड़ती इतराती।
तितली मधुकर मधु के लोभी,
रसपान करें हो पुलकित मन।।स्वागत।।
शीतल सुवासित झौंके पवन के,
आल्हादित करती तन औ मन।
नाना राग रागिनियों की धुन पर,
नाच रहा है मन मयूर मगन।
यौवन मद में मस्त नर नारी,
झूमें देख रति अनंग मिलन।।स्वागत।।

दीप चन्द्र पान्डेय
बागेश्वर।














KissaKriti | बसंत
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