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ज़िंदगी
April 11, 2017 | Poonam Matia






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ज़िंदगी को आज़माना जानती हूँ
मैं ग़मों में मुस्कुराना जानती हूँ
ये मेरा सजदा नही अख़लाक़ ही है
यूँ तो मैं भी सर उठाना जानती हूँ

दो कदम चलके पास आ जाते
इस क़दर फिर न फ़ासला होता
चाँद होता तुम्हारी बाहों में
बादलों-सा जो हौसला होता

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Poonam Matia
thnx for reading ......all 107 who read


KissaKriti | ज़िंदगी