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मेरा पहाड़
March 18, 2017 | Om Fulara






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श्वेत धवल से चमकते हिमशिखर
प्रकाश की लालिमा में
सतरन्गी चादर ओढे
जन्नत के दर्शन कराते
निर्बाध वेग से बहती
मंद सुगंधित मलय पवन
मरूभूमि में भी पुष्प उगा दे
मंदिरों में बजते घंटे घडियाल
आस्थाओं के पुल बाँधे
ईश्वर से साक्षात्कार कराते
ऊँची ऊँची पर्व त श्रंखलाओं से
बहते झरनों की सुमधुर आवाज
संगीत की पहचान कराती
पग पग पर रूप बदलता
मेरा यह पहाड़
कितना विचित्र और अनोखा
धरती और स्वर्ग का
मिला जुला रूप
मानव मन को प्रफुल्लित करता
हर पल अपनी ओर
खींचा रहता है

KissaKriti | मेरा पहाड़
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