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दादी माँ
December 8, 2017 | Sachin Om Gupta






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आओ तुम्हें मैं एक बात बताऊं,
एकदम सच्ची, पूरी पक्की
दादी माँ होती है ,
घर की नींव एकदम पक्की |

कमर झुका कर थी वो चलती,
धीमी सी थी उसकी चाल
दुबला-पतला शरीर था उसका ,
थे सर पे चमकते सफ़ेद बाल |

जब भी मैं परदेश से घर को आता,
उसके पास जाकर था मैं बैठता
कुछ उनसे अपनी मै कहता,
कुछ उनकी था मैं सुनता |

अपने मन में यह सोच रहा,
खूब बड़ा बन जाऊ मैं
दादी की सेवा करके ,
जीवन को सफल बनाऊ मैं |

माना की उसकी उम्र थी पकी ,
लेकिन मेरी दादी नहीं थी थकी |

जीवन में तुम हमेशा अपनी दादी की सेवा करना,
फिर अपनी जेबें तुम उनकी दुआओं से भरना |

कमर झुका कर थी वो चलती,
धीमी सी थी उसकी चाल
दुबला-पतला शरीर था उसका ,
थे सर पे चमकते सफ़ेद बाल |

धन्यवाद...


KissaKriti | दादी माँ
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