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"सुहागरात"
December 23, 2017 | Sachin Om Gupta






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"सुहागरात" (मधुमायिनी)

उस पहली रात की बात न पूछो
उस सुहागरात की बात न पूछो,
मधुमायिनी की उलझन में थी मैं
थोड़ी शरमायी सी थी मैं
थोड़ी घबरायी सी थी मैं,

उस अलबेली रात की बात न पूछो,
मेरे मन की पराकाष्ठा मेरे मन में दबी रही
तब तक वो अपनी कामुकता की,
तस्वीर दिखाकर चले गए |
जब ज़िस्म से ज़िस्म का मिलन हुआ
तब धड़कनों की रफ़्तार बढ़ चली,
मेरे यौवन की गरिमा पर अपने पुरुषार्थ के यौवन का रंग,
मेरे यौवन में रंग कर चले गए |

उस रात की बात न पूछो,
जिसमें करनी थी सारी बातें
उस रात की एक ही बात,
जिसमें वो अपने वासना का
सितार बजाकर चले गए |

उस अलबेली रात की बात न पूछो,
जिसमें हम सदियों से गुम जीवन जी गए,
उस सुहागरात की बात न पूछो,
जिसमें हम एक-दूजे को पी गए |

उस पहली रात की बात न पूछो
उस अलबेली रात की बात न पूछो,
उस सुहागरात की बात न पूछो |


धन्यवाद...
(सचिन ओम गुप्ता, चित्रकूट धाम)



KissaKriti | "सुहागरात"
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