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पचास बरस
May 27, 2017 | Mohan Joshi






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दाँतों की ल्हैगेछ सफेदी , बालों में सरि ऐगे।
पचास बरस की घडी विदाई फिर लै पडि-पडि ऐगे।।

नौंणी में जास् बरस रडणा
उमरी का हुलार- पखाँणाँ।
पिनाऊ का पात म् पाणी
धरिया हि में पराँणाँ।

बखत ज्वानी भरकस काँ गे फाँम निगुरी रैगे।

बचपन का सुख छना लपेटी
हि का मुणि क्वे क्वाँणाँ।
भरकस नजर गजर काँनों का
र में ग्वाता लगाणाँ।।

मन की सोचिया बात साँवरी !मन मेंजी धरी रैगे।।

स्वैंणों का सुख सबै ल्हिबेर
जाँणि काँ जिन्दगी ल्हैगे।
जदुग ल्हैगेछ पार जिन्दगी
उदुग लै आब् काँ रैगे।।

बातों में दुख सबै कैबेर, कहानि अधूरी रैगे।।


KissaKriti | पचास बरस
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