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काफ़िया-आ रदीफ़-क्यों रही ह
November 14, 2016 | Alok Pandey






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ये किश्मत उन्हीं से मिला क्यों रही है
मिरे दिल को ऐसे सता क्यों रही है।

बना सीढियाँ आसमाँ तक जमीं से
फकत रस्मे उल्फ़त निभा क्यों रही है।

कहीं कोई अपना मिलेगा सफर में
उम्मीदों का दीपक बुझा क्यों रही है।

तुम्हीं हो तुम्हीं हो मेरे दिल की धड़कन
हवा कान में गुनगुना क्यों रही है।

नहीं जिसने झाँका गिरेबाँ में अपने
मुझे आइना वो दिखा क्यों रही है

ये राजीव इतना ही बस पूछता है
जवानी नशे में नहा क्यों रही है।

*****
डॉ.राजीव जोशी
बागेश्वर।

KissaKriti | काफ़िया-आ रदीफ़-क्यों रही ह
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