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इमली का चटकारा
March 24, 2016 | Yojna Jain






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चट चट चट..चटाके मारते मारते कंचन ने 1/2 किलो इमली अकेले ही चट कर दी
बित्ते भर की लड़की.....
आखिर कितनी खा लेगी, सोच के माँ ने छुपाया नहीं इमली का पूडा जब कंचन के पापा ने office से आके फ्रिज के ऊपर रखा....
सोचा था माँ ने एक बार कि कहीं ये लड़की पिछली बार की तरह आज ही रात ये पूरा पूड़ा ना चट कर जाए, इसलिए थोड़ी निकाल के बाकी संभाल दे...
पर फिर खाना बनाने के चक्कर में भूल गई..... और देखो.........

15 साल की कंचन! बड़ी हो रही थी; पर बदली नहीं थी खाने पीने की उसकी चटोरी आदतें आज भी; खासकर खट्टा; इमली, कच्चे आम, अचार ये तो उसकी कमजोरी थे!
फिर अब क्या हो गया 30 की उम्र में ki कंचन के मुह में इमली का खट्टा ऐसे लगता है जैसे जहर.....
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आगे पढना चाहती थी, पर मथुरा जैसे छोटे शहर की लड़की, शादी कौन करेगा अगर 25 पार हो गए तो!
22 की उम्र में ही डोली उठ गई!
बनिया family थी; बहुत दहेज़ देके हुई शादी कंचन की; पापा को अपनी पुस्तैनी जमीं बेचनी पड़ी; पर कोई बात नहीं; ऐसा हीरे जैसा लड़का कहाँ मिलता है.........
सहारनपुर में बहुत बड़ी मिठाई की दूकान के मालिक, शहर के जाने माने लोग थे भाई! और लड़का कंचन से कम पढ़ा लिखा था तो क्या हुआ, आमदनी तो बहुत अच्छी थी......
अच्छा छोटा परिवार था.....
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खुश थी कंचन शादी के बाद .......
बहुत खुश रही कंचन अगले 6 महीने..........
खुश रही कंचन उसके अगले 6 महीने..........
थोडा खुश रही कंचन उसके और अगले 6 महीने..........
खुसी आँखों के आगे से ओझल होती दिखने लगी धीरे धीरे अगले 1 साल में
और काफूर हो गई उसके 1 और साल ख़तम होते होते तक.......
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शुरुआत शादी के २ दिन बाद ही ये बता देने से हो गई थी कि बहू रानी, अब जल्दी से यानी अगले 9 महीने में एक चाँद सा बेटा दे दो.............
चाँद हो या चांदनी क्या फरक पड़ता ...
और क्या ये मेरे हाथ में है...... पर बहुएं ऐसी बातें नहीं करतीं हैं तो वो कुछ नहीं कहती बस हंसती रहती.....ये ही उसकी माँ ने भी सिखाया था....... कि बस कोई कुछ भी कहे चुप रहना और अगर कुछ बूरा भी लगे तो हर बात को हंसी में टाल जाना .........

फरमाइश की जगह 1 साल के अन्दर तानों ने ले ली......... सिर्फ घर वाले नहीं पडोसी और रिश्तेदार आगे थे इन तानों में.......... और हमारे देश में मौत मुफ्त हो या ना हो, सलाह मुफ्त है........... सलाह देते समय हर कोई उस subject का सबसे जानकार इंसान बन जाता है....... चाहे आप कोई भी टॉपिक लेलो, सलाह देने वालों को सब पता है और उनकी सलाह जाँची परखी और best ............

कंचन के होठों से हंसी के जाने और हर समय आँखों में आंसुओं ने तब ले ली जिस रोज़ चिराग ने पहली बार उस पर हाथ उठाया ... और सब्जी में थोडा सा नमक ज्यादा होने पे उस दिन कह ही दिया...... “एक बच्चा तो तुम पैदा कर नहीं सकती........ कम से कम खाना तो ढंग का बना दिया करो.........

मथुरा की थो तो क्या हुआ......... संस्कारी थी तो क्या हुआ............ दिल तो था....... दुखता तो था......... दिन भर सास के ताने और आज चिराग........ ??? जिसे सब जोरू का गुलाम कहके चिढाते थे.....

खैर अगले दिन चिराग ने माफ़ी मांगी और उसे घुमाने भी ले गया......... पर एक बार आ जाए तो दिल की दरार भरी है कभी......?
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दिल्ली आये दोनों....... कई महीने टेस्ट करने के लिए दिल्ली के पता नहीं कितने चक्कर लगाये........ 4 साल हो चुके थे.......... ताने और सलाह का प्रक्रम दिन ब दिन बढ़ता जा रहा था.............
सारे टेस्ट नार्मल थे कंचन के...........
आखिर उसका इतना बोलना कि “अपने भी एक बार करवा लो............”
क़यामत आ गई...............
उस रात चिराग ने उसे पीटा.............
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खैर बहुत अच्छा था चिराग......... उसने 1 महीने बाद आखिर अपने tests करवाए जो ठीक ही आये थे......
कुछ दवाइयां बतायीं doctor ने दोनों को.............
फिर अगले २ साल फिर से दवाइयों का, इलाज का दौर चला.............. हमेशा हंसती रहने वाली कंचन मुस्कराती थी दुनिया के सामने........... बहुत बोलने वाली कंचन अब तोल मोल के बोल बोलने लगी थी.......
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कभी कभी सोचती थी.......... मुझे तो बच्चे इतने भी पसंद नहीं........ चाहिए पर ......... क्या मेरा या किसी का भी जीवन सिर्फ अगली पीढ़ी को पैदा करना और बड़ा करना है..........
तो मै क्यों आई हूँ इस दुनिया में............ अगर बच्चा नहीं होगा तो क्या मेरा कोई अस्तित्व नहीं ????
मेरे माँ बाप ने क्या मुझे इसीलिए पैदा किआ था, इतने लाड प्यार से पाला था कि एक दिन मेरे बच्चे होंगे.......... अगर नहीं होंगे तो शायद मुझे जीने का.... खुश रहके जीने का कोई अधिकार नहीं...........??
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वो जिंदादिल लड़की कंचन खुश रहना चाहती थी........ उसे आता था खुश रहना बच्चे के बिना भी.......
पर अगर उसने ऐसा किआ तो उसका पति क्या सोचेगा कि वो कितनी बेदिल है....... उसके सास ससुर, अड़ोसी पडोसी रिश्तेदार, सारा सहारनपुर, सारा मथुरा, और शायद सारा इंडिया उसे बेशरम, बेदिल, संवेदनहीन कहेगा.......
आखिर हमारे समाज, हमारे देश में कोई बिना संतान के खुश कैसे रह सकता है............
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पर फिर एक चमत्कार हुआ...........
या शायद 33 करोड़ देवी देवताओं ने उसके सास ससुर, सारे अडोस पड़ोस, सारे रिश्तेदार, सारे सहारनपुर, सारे मथुरा और इंडिया में उन सबकी सुन ली जो उसके बच्चे न होने को लेकर इतना चिंचित थे, जिनकी सलाहों का भंडारा उस पे अब तक जाया हो रहा था और जो हर दम बस उसी के लिए ये दुआ मांगते थे की उसकी गोद भर जाए.............
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एक अच्छी चीज़ जो उसने की थी वो ये भी २ साल पहले पास के एक computer center में data operator की नौकरी कर ली थी...... थोड़े पैसे भी मिल जाते थे और 9- 2 बजे तक का टाइम भी कट जाता था....
कभी कभी वो office से जल्दी निकल कर दुकान पे गोल गप्पे तो कभी इमली खा कर मन ही मन बहुत खुश भी होती थी............
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घर में खुशियाँ छा गयीं....... कंचन सोचती है कभी कभी..... अफगानिस्तान में चल रही मार काट देख के, तो कभी एक्सीडेंट में जवान लड़का मर गया, या बम विस्फोट में इतने लोग मर गए.........कितने ताम झाम पाल रखे हैं न हमने अपने ख़ुशी के इर्द गिर्द... बहुत सारी शर्तें पूरी होनी चाहिए जिससे हम खुश हों.......... या तो पालना हो, या शादी हो, या नौकरी लगे, प्रमोशन हो, पैसे आयें, बीमारी जाए........(जो लगी तो कभी नहीं जाएगी), मकान बने, ...... ये अच्छा होगा तब मैं खुश होंगा, ये अच्छा होगा तब मैं खुश होंगा..... अरे यार कल का पता नहीं..... आज ही खुश हो लो
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खैर सब खुश थे तो कंचन के दिल की ख़ुशी उसके चेहरे पे भी आ ही गई..........
4 महीने अच्छे से गुजरे............उसने खून इमली खायी........ खूब अचार खाया.......बहुत मज़ा आया उसे, वो बहुत खुश थी अब.............. बच्चे के लिए इतना नहीं, जितना इमली के चटकारे लेकर...........
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पर शायद वो चटकारे उसके नसीब में नहीं थे........
उसका अजन्मा बच्चा जिस दुनिया से आया था, थोड़े दिन की ख़ुशी उसे देकर चला गया वापस उसी दुनिया में............ कई रातें रोने के बाद एक दिन उसने फ्रिज के ऊपर रखी एक टुकड़ा इमली मुँह में डाली तो.........
30 की उम्र में आज जाके पहली बार उसे लगा इमली का स्वाद ...........जैसे जहर.......
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सब कुछ उजाड़ गया......... सब येही कहते थे......... हर कोई उसे बस आके दिलासा देता और दो मुफ्त सलाह....
पर घर वालों ने तो दो दिन के बाद से हाल चाल पूछना भी बंद कर दिया.......
उजाड़ गया सब कुछ.......... कंचन ने खुद से पुछा........ तो फिर मैं क्यों जिन्दा हूँ..........? जिन्दा हूँ न? तो बस......
सब तभी उजड़ता है जब आप उसे उजड़ने देते हो.............
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इस घटना के 4 महीनों में संभल गई थी कंचन....... अब वो पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कंचन थी..........
रोने वाली नहीं, जीने वाली.........
उसके आस पास की दुनिया और बेरहम हो गई पर वो उतनी ही मजबूत..........
उसने खुश रहना सीखा.......... फिर से इमली खायी, बाज़ार में जाके गोल गप्पे खाए... कोई बात नहीं अगर पास की चुगलखोर शर्मा आंटी ने उसे देख लिया तो............
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पास के मंदिर के बाहर भीड़ लगी थी सुबह सुबह .........
कोई अपनी २ महीने की बच्ची को छोड़ गया था मंदिर के बाहर .........
बहुत झगड़ी, सारे संस्कार और माँ की सीख भुला के झगड़ी कंचन हर किसी से...........
और अपना लिया उस बच्ची को............
प्यार से उसका नाम रखा ........... इमली................
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एक साल बाद ही कंचन के अपने बाग़ में भी फूल खिला एक नन्हा सा प्यारा सा और उसकी बगिया हरी हो गई................
पर आज भी......... उम्र के 50 वें पड़ाव पर खड़ी कंचन को जो चीज़ सबसे प्यारी है... वो है .......
उसकी खट्टी मीठी इमली..............

समाप्त!!!


Likes (2) Comments (1)

Alok Pandey
Nice 1


KissaKriti | इमली का चटकारा