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अनुभव का महत्व
April 19, 2017 | Om Fulara






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1
बहुत समय पूर्व की बात है एक राजा था. वह अपनी प्रजा से बहुत प्रेम करता था. उसकी प्रजा उसे अपना भगवान मानती थी. वह हमेशा प्रजा के सुख दुख में शामिल रहता था. एक बार उसके दरबार में एक गरीब व्यक्ति रोजगार की तलाश में आया. वह बहुत परिश्रमी था. उसकी गरीबी को देखकर राजा ने उसे अपने वहाँ काम पर रख लिया . अपने परिश्रम से कुछ ही महीनों में वह राजा के दिल को जीतने में सफल हुआ. अपने काम के प्रति लगन व उसकी मेहनत को देखकर राजा ने उसे अपना प्रधान सलाहकार नियुक्त कर दिया . अब राजा राज्य के हर कार्य में उसकी सलाह लिया करता था. राज्य अब दुगुनी प्रगति करने लगा . धीरे धीरे राजा बूढा हो गया. उसकी संतान राजकाज चलाने के योग्य नहीं थी. एक दिन राजा ने उस गरीब को अपने पास बुलाया और अपने दिल की बात उसे बतायी और उससे वचन लिया कि उनके मरने के बाद भी वह राज्य को सुचारू रूप से चलाने में उसके बेटों की मदद करेगा .
2
कुछ ही दिनों में राजा की मृत्यु हो गयी. अब उसका बडा बेटा राजगद्दी पर बैठ गया . वह गरीब अपने वचन के अनुसार अपने कर्तव्य का पालन करता रहा. परंतु राजा के लड़कों ने कभी उस गरीब की ओर ध्यान नहीं दिया . नये नये कर्मचारी आते रहे और अपनी चिकनी चुपडी बातों से राजा को खुश करते रहे और मालामाल होते रहे. परंतु उस गरीब ने कभी अपने कर्तव्य को नही छोडा. एक नौकर क्या कर सकता है जब राजा को ही राज्य की परवाह नहीं हो तो . धीरे धीरे राज्य में संकट आने लगा . राज्य की खुशहाली समाप्त हो गयी. बेचारा गरीब हर पल चिंतित रहने लगा . जिस राज्य को उसने अपने खून पसीने से सींचा था उसकी नजरों के सामने ही बर्बाद हो रहा था. कई बार उसने इस बारे में अपनी चिंता राजा से की परंतु हमेशा उपेक्षा का शिकार होता रहा . अब उसे भी घुटन होने लगी . नये चापलूस कर्मचारी दिनोदिन फलते देख उसने भी राज्य से नौकरी छोड़ने का मन बना लिया . इस बारे में जब उसने राजा से कहा तो उसने खुशी से स्वीकार कर लिया . यही राजा की मूर्खता थी जो उसके त्याग को नही समझ पाया . उसे इस बात का ग्यान ही नही था कि किसी भी कार्य को करने व राज्य को चलाने में अनुभव का बहुत बडा योगदान है . ऐसे पुराने लोगों के जाने से राज्य पर संकट आ सकता है .
3
अंत में मजबूर होकर उस गरीब को नौकरी छोड़नी पडी. उसके जाने के बाद राज्य पर कई संकट आने लगे . इस संकट की घडी में किसी भी कर्मचारी ने उसका साथ नहीं दिया . धीरे राज्य बर्बाद हो गया . अंत में राजा को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने उस गरीब को फ़िर से नौकरी पर रखकर उसी की सलाह से राजकार्य करना शुरू किया . एक बार फ़िर से राज्य में खुशाहाली छा गयी. इसीलिये कहा गया है कि परिश्रम और त्याग की अनदेखी करने वाला कभी सुखी व संपन्न नहीं हो सकता . इंसान में सद्गुणों को पहचानने की क्षमता हो तभी वह सुखी हो सकता है .


KissaKriti | अनुभव का महत्व
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