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संवेदनाएं
April 26, 2017 | Yojna Jain






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सब कुछ बदल सकते हो, खरीद सकते हो, लेकिन मेरी संवेदनाएं नहीं......
पर सुन लो ये भी, कि........

मेरी संवेदना इतनी कमजोर नहीं की हर बात पे बिलखें......
पर सिसकती जरूर हैं ......हाँ सिसकती जरूर हैं .......
जब किसी मासूम को सिर्फ उसकी पैदाइश के कारण मारा जाता है
जब कोई मरता है क्योंकि वो, वो खाता है जो तुम्हे पसंद नहीं
जब कोई सहता है क्योंकि उसका विश्वास अलग है तुम्हारे तरीकों से
सच कहो क्या ये इतनी बड़ी बात नहीं कि बवाल किआ जाए
क्या सबको नहीं जीने का हक़ दिया जाए..........???

मेरी संवेदनाएं हमेशा सिसकती है, हमेशा सिसकती हैं
जब कहीं अन्याय होता है,
क्योंकि कोरी सोच का न कोई जात न धरम होता है
कोने में बैठ के सुबकती हैं, डरती है अँधेरे से अपने ही मोहल्ले में....
बस अब बहुत हुआ......

बक्श दो, बक्श दो हर बात को मजहबी जामा पहनाना
रोको इस खून को बेवजह उबलने से और
रोक लो सिसकियों को बिलखने से.......
रोक लो सिसकियों को बिलखने से.......

KissaKriti | संवेदनाएं
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