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कुछ
April 19, 2017 | Amardeep Singh






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आज मौसम का है
मिजाज़ कुछ
सवाल कुछ और
जवाब कुछ

वो मिलता भी नहीं
दूर होता भी नहीं
आज के दौर में है
इश्क़ का अंदाज़ कुछ

रिश्तों का च्युंगम है
चबाने के लिए
देखिये वक़्त के
नए नए रिवाज़ कुछ

चुप से चलता भी नहीं
बोल के होता भी नहीं
आम आदमी को
मिली है आवाज़ कुछ

मैं कवि एक दिन
दर्द से मà �° जाऊँगा
तब तलक कीजिये
सच का लिहाज़ कुछ

आज मेरा नहीं ये
कल तुम्हारा नहीं
वक़्त के ना होने का
गहरा है राज़ कुछ

KissaKriti | कुछ
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