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कभी कभी बातें भी करें
July 22, 2017 | Jyotsna Kalkal






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बड़े लाजवाब, बेमिसाल
होते हैं ये शब्दों के जाल
तो लाज़मी है कभी कभी
बातें भी करें
काफ़ी नहीं सिर्फ़ उंगलियों की हरकत
सन्देश पहुँचाने को
कभी गले मिलें,
अपनों से मुलाकातें भी करें
ये मोबाइल पीढ़ी
कहाँ से लाएगी संस्कार
उनके हवाले
रीति रिवाजों वाली सौगातें भी करें
एप की दुनिया ने
गैप ला दिया कितना
कुछ फ़र्ज़ अदा
मानवता के नाते भी करें
आधुनिकता की दौड़ में
रीता ही ना रह जाए जीवन
खुलकर कूदें, भागें,
कभी कभार खुराफातें भी करें
सफ़र ज़िन्दगी का
इतना भी मुश्किल नहीं दोस्तो
काम खुशियाँ बाँटने का
यूँ ही आते जाते भी करें

ज्योत्स्ना कलकल

KissaKriti | कभी कभी बातें भी करें
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