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ग़ज़ल
April 19, 2017 | Rajeev Joshi






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न हमको आजमाना हम नयी पहचान रखते हैं
दिलों में आग और आँखों में हम तूफ़ान रखते हैं।

जहाँ सुख शांति हो चहुँ ओर जहाँ बचपन खिले हर दम
हम अपने दिल में इक ऐसा ही हिंदुस्तान रखते हैं।

न कमजोरी समझना तुम ये तो संस्कार हैं अपने
जो अपने दुश्मनों का भी बहुत हम ध्यान रखते हैं।

कटा सकते हैं सर अपना झुका सकते नहीं लेकिन
हथेली पर वतन के वास्ते हम जान रखते हैं।

कभी मीरा दीवानी तो कभी कबीरा दीवाना था
मगर रसखान इन सबसे भी ऊँचा स्थान रखते हैं।

तरक्की लाख कर ली हो मगर मासूमियत वो ही
गवाह हम आज भी देखो ख़ुदा-भगवान रखते हैं।
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डॉ.राजीव जोशी
बागेश्वर।

KissaKriti | ग़ज़ल
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