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स्त्री
August 18, 2017 | Ankit Tiwari






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मैंं हूँ।
मैं ही रहूंगी।।

मैं ही चंडी दुर्गा मैं काली का अवतार भी मैं ।
राधा बनकर प्रेम पवित्रता का आधार भी मैं ।।

मुझ सीता से सीखा लोगों ने धरती जैसा तप।
पार्वती रूप में, मैंने ही दिखलाया भोगों की जड़ता नश्वरता।।

यशोधरा बन,मैंने भगवान बनाया।
उर्मिला रूप मैं, लक्ष्मण रूपी भाई का आदर्श जग को दिखलाया।।

गांधारी बन मुझ से तप करना मुनियों ने सीखा।
शकुंतला बन माँ के लालन को दुनिया ने देखा।।

भोगों को जब मैं भोगूँ गणिका मैं कहलाती हूँ।
भोगों को त्याग कर मैं मीरा बन जाती हूँ।।

समस्त सृष्टि का कारण मैं ।
फिर किसके साथ जियूंगी ये बात ही व्यर्थ ।।

मैं दीन नहीं काली हूँ।
शव को शिव बनाने वाली हूँ।।

मैं हूँ।
मैं ही रहूंगी।।
🙏🏻😁🙏🏻
©
।।अंकित तिवारी।।

KissaKriti | स्त्री
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