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तुम हो बस तुम
April 22, 2017 | Rajeev Joshi






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प्रत्येक क्षण मधुरस
प्रत्येक कण समरस
तुम हो बस तुम

कहीँ धूप में छाँव सी
दूर बसे एक गाँव सी
तुम हो बस तुम

सुबह की मृदुल पवन की सी
ओँस की बूँदों से भरी चमन सी
तुम हो बस तुम

हथेली की रेखाओं सी
गँगा की धाराओं सी
तुम हो बस तुम

प्रार्थना में मौन शक्ति सी
ध्यान के अपरिमित भक्ति सी
तुम हो बस तुम
तुम हो बस तुम

KissaKriti | तुम हो बस तुम
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