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मुबारक हो
October 18, 2016 | Mohan Joshi






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मिले सम्पदा सुख खुशी हर तरह की।
मुबारक हो घडी़ नव बरस सत्रह की।।
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नित आनन्द लेकर किरण हो सुबह की।।
हों सपने मधुर रात हो बहकी बहकी।।

गमों का न दुख का न हो नाम लेना।
मन के आँगन में हो लिए झुंड तितली।।

यूँ चाहत की बुलबुल रहे चहकी चहकी।।
ये जीवन की बगिया रहे महकी महकी।

आसमां से उतर रंग भरे चाँदनी के।
फिजा में बहारें हों तरह तरह की।।

हौं आसान सी मुशकिलें बेवजह की।
मुस्कराहट हो अंजाम लिए हर फतह की।

रहे शान्ति सीमा धरा उर्वरी सी।
मिटे वेदना दुसह गृहकलह की।।

KissaKriti | मुबारक हो
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