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" तुम आए कुछ यूँ "
November 3, 2017 | Sachin Om Gupta






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" तुम आए कुछ यूँ "

तुम आए कुछ यूँ...
आज मौसम भी सोच में,
और बादल भी मौज में
हवाओं की हसीन गुफ्तगू
कब से थे दूर, क्यूँ थे मजबूर ,
तुम आए कुछ यूँ...
जरा सहमें से, खड़े हम थे,
क्यूँ छलक आए आसूं |
चले हम साथ ,ले हाथों में हाथ
कहीं दूर चले जा रहें क्यूँ ,
देख रहा था मैं,सोच रहा था मैं
कि आँखे हुई नम क्यूँ |
रुक ही गया मैं, थम ही गया मैं
शर्माएं जब तुम यूँ |
ख़तम हुआ जब पल ये हसीं तो,
आधे हुए हम क्यूँ |
कि टूटे से है, अधूरें से हैं,
पर पास नहीं तू क्यूँ |
है इंतजार तुम्हारा,ये प्यार तुम्हारा,
एक बस मैं ही हूँ |
ये बातें,ये यादें, ये मुलाकातें,
तुम आए कुछ यूँ ...तुम आए कुछ यूँ ...


धन्यवाद,
(सचिन ओम गुप्ता, चित्रकूट धाम)

KissaKriti | " तुम आए कुछ यूँ "
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