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मौसम बदलते हैं
April 26, 2017 | Yojna Jain






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कल वो नही था जो आज है
और ना ही जो आज है वो कल होगा

दिशायें बदल जाती हैं
धारणायें बदल जाती हैं
बदल जाते हैं लोग!!

विचार बनते हैं, और पिघलते हैं
क्योंकि मौसम बदलते हैं!!!

कल तक जिस रमणिए आँचल में लिपटी हुई थी धरती,
आजकल वो कल पतझड़ हो गया है
पर नये समय के साथ फिर से बहारें आती हैं
नये सूरज के संग नयी कलियाँ खिल जाती हैं
नये चमन खिलते हैं
क्योंकि मौसम बदलते हैं!!!

सुख दुख का अभिप्राय है
सांझ भोर का पर्याय है
आज के दिन और कल की रातें
यही सबक सिखलाते हैं
हे मानव, हार ना मान,

क्योंकि मौसम आते हैं, जाते हैं!!!

KissaKriti | मौसम बदलते हैं
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