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October 25, 2016 | Yojna Jain






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सुबह सुबह चार बजे उठ कर रोज़ ठन्डे पानी से नहाना और फिर कान्हा जी की २-३ किताबें पढ़ 5-7 बजे तक पूजा करना श्री एवं श्रीमती कालरा का रोज़ का नियम था...

7-8 बजे तक फिर हर रोज़ घर में संस्कार या आस्था चैनल चलता था और धर्म की, ग्रंथों की, पुरानों की बातें बहुत ध्यान से सुनते थे !

६० के पड़ाव में प्रवेश कर चुके थे कालरा दंपत्ति. बच्चे विदेश रहते थे और दोनों अकेले रहते थे घर पे...

कोई था तो बस 17 साल की एक छोटी सी लड़की जो काम के लिए उनके पास रहती थी...

आज के प्रवचन का विषय था – परोपकार

कालरा आंटी ने घडी देखि – 7 बजे थे...

अभी तक नहीं उठी ये लड़की.

गाली देते हुए नौकरानी को उठाया और भन्नाते हुए बोली – 7 बज गए हैं, अभी तक सो रही है.

आंटी बुखार सा लग रहा है... कल रात आपके पैर दबाते दबाते 12 बज गए थे....

अच्छा जबान चलाती है... रोज़ का नाटक है बुखार का.... उठ जल्दी और चाय बना...

रिंकी उठी और मुड गयी kitchen की तरफ...

आस्था चैनल पे प्रवचन चल रहे थे जिसे कालरा अंकल और आंटी दोनों बड़े ध्यान से बैठ सुन रहे थे...

शीर्षक था – परोपकार, मानवता और दया !!!

योजना जैन

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Nice

Alok Pandey
Nice.


KissaKriti | आडम्बर