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तुम बसंत बन आ जाओ
May 5, 2017 | Yojna Jain






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तुम बसंत बन आ जाओ मैं फ़ूल सी खिल जाऊँगी !
लहराओ बनके बादल मैं बारिश बन झर जाऊँगी!
सब लेना कुछ मत देना सिवा प्रीत के ऐ हमदम,
वरना बिन खिले, बिन झरे, बेमौसम मुर्झा मैं मर जाऊँगी !

KissaKriti | तुम बसंत बन आ जाओ
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