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गुमनाम है वो
March 18, 2017 | Alok Pandey






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इस धरा को कह कर माँ
जिसने जां लुटाई थी
हँसते हँसते सीमा पर
दुश्मन की गोली खायी थी
आज गुमनाम है वो |

लिपटे तिरेंगे में जिसका तन
उसके घर पर आया था
हजूम लगा था तारण घाट
शस्त्र सलामी ने जिसका
शहीदी गीत सुनाया था
आज गुमनाम है वो |

उसके घर की, माँ की
बच्चों की,क्या किसी कà �‹
आज भी याद सताती है
जिनको बचाने शहीद हुआ था
क्या उसके घर से इदी, दिवाली आती है
पनघट भी उसका सूना है
सूखी आज दीवाली है
क्यूंकि आज .....
गुमनाम है वो

KissaKriti | गुमनाम है वो
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