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"क्या लिखूँ "
January 11, 2018 | Sachin Om Gupta






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मन की कहानी लिखूँ
या आँखों का पानी लिखूँ
कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ
या दिल का सारा प्यार लिखूँ
फूलों की महक लिखूँ
या पत्तों की खनक लिखूँ
बचपन के लड़कपन का जमाना लिखूँ
या बारिशो में वो बेवजह का छपछपाना लिखूँ
वो डूबते सूरज को देखूँ या उगते फूल की सांस लिखूँ
वो पल में बीते साल लिखूँ या सदियों लम्बी रात लिखूँ
मैं तुमको अपने पास लिखूँ या दूरी का अहसास लिखूँ
मैं अंधे के दिन मैं झाँकूं या आँखों की मैं रात लिखूँ
कृष्ण की बांसुरी का संगीत लिखूँ
या मीरा की उनसे प्रीत लिखूँ
मंदिर की घंटियों की आवाज लिखूँ
या मस्जिद की अजान का आगाज लिखूँ
मैं हिन्दू मुस्लिम हो जाऊं या बेबस इन्सान लिखूँ
मैं एक ही मजहब को जी लूं या मजहब की आंखें चार लिखूँ
मन की कहानी लिखूँ
या आँखों का पानी लिखूँ
क्या लिखूँ?.......
क्या लिखूँ?.......

धन्यवाद...
(सचिन ओम गुप्ता, चित्रकूट धाम)



KissaKriti | "क्या लिखूँ "
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