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कृति - कविता (Poems)
(Total: 103)
जिंदगी प्रश्‍न है यदि तू,
तो मैं उत्तर बन जाऊंगी....
बार बार तुझे ये बताऊंगी...
कि यदि तू है, तो मैं तेरी पूरक हूँ...
तू दिशा है, तो मैं दिशा सूचक हूँ
तू विचार है तो मैं योजना हूँ...



किस्साGO - The StoryTeller
(Total: 15)
चलो आज एक कहानी कहते हैं...
न राजा की न रानी की...
तेरी मेरी जिंदगानी की
एक कहानी कहते हैं...



Books
(Total: 1)
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आवाज़ का आगाज़
(Total: 6)
kissa kriti gets a voice
(pilot phase)
Listen to your heart now........



शेर-ओ-शायरी
(Total: 17)
Saying a lot in few words....
(गागर में सागर)




New Arrived Krities


मन

आलोक पाण्डेय | (Reads 123)



मंगलस्वरूप

आलोक पाण्डेय | (Reads 72)



बसंत

Deep Chandra Pandey | (Reads 77)



सुआ बसन्ता

Om Fulara | (Reads 70)



मैं चित्रकूट का घाट तेरा

Sachin Om Gupta | (Reads 75)



शेर-ओ-शायरी


ख्वाब

Yojna Jain | (Reads 830)

ख़्वाब हौसलों से मुकम्मल होते हैं,
और हौसले डर को जीत कर ज़िंदा...
ज़िंदगी का ये फ़लसफ़ा जो समझ गया,
उसने समझो सारे ख़्वाब जी लिए...



शहर

Yojna Jain | (Reads 825)

इतना धुआं इतना गुबार इन शहरों की किस्मत में है
इतना लालच, इतनी हवस शहर वालों की फितरत में है
बहुत मुश्किल है कि अब इसकी सीरत बदल जाए
गाँव तो शहर बन सकता है बेशक
पर बमुश्किल शहर कभी गाँव बन पाए



गुप्ता जी के अल्फाज

Sachin Om Gupta | (Reads 99)

अपने जीवन के कुछ हसीं पल को अपने शब्दों की माला में पिरो रहा था,
कुछ अनजाने आए और,
मैं सरेआम बिक गया |



तुम अपनी कहानी का बस तुम ही एक किरदार हो,
तुम ही निर्दोषी हो, तुम ही गुनहगार हो |



आखों में हो गर गुरुर तो इंसान को इंसान नहीं दिखता,
गर अपने ही मकान की छत पर चढ़ जाओ तो अपना ही मकान नहीं दिखता |



मन का क्या है, वो तो ख्वाहिशों में ही डूबा है,
जिंदगी तो डूब कर चली जा रही है |


आदमी आजाद है देश भी स्वतंत्र है,
राजा-रानी का युग गया अब तो प्रजातंत्र है |



थोड़े-थोड़े समय की मुलाकात अच्छी है सचिन जी,
महत्व व् प्रतिष्ठा खो देता है रोज का आना-जाना |


धन्यवाद्...
~सचिन ओम गुप्ता~



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इमली का चटकारा

(Reads 1452)


चट चट चट..चटाके मारते मारते कंचन ने 1/2 किलो इमली अकेले ही चट कर दी
बित्ते भर की लड़की.....
आखिर कितनी खा लेगी, सोच के माँ ने छुपाया नहीं इमली का पूडा जब कंचन के पापा ने office से आके फ्रिज के ऊपर रखा....
सोचा

.....More



Author


Yojna Jain




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परछाई
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वेदना
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मेरा पहाड़
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धरणी नववर्ष
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इमली का चटकारा
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खिड़कियाँ
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इमली का चटकारा
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प्यार के उजाले
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हाँ, वो घर ‘घर’ लगता था
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English



The Cave
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Life
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Time
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Himalayan Dooms Day: End of many stories
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NATURAL AFFECTION
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Accidental drop
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Kumaoni (कुमाओनी)



'पखाँणों में नि जए'
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चुनावक दौर
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बेरोजगार व्यथा
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सुआ बसन्ता
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असोज
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इजा तू महान
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सुआ बसन्ता
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पचास बरस
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