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कृति - कविता (Poems)
(Total: 103)
जिंदगी प्रश्‍न है यदि तू,
तो मैं उत्तर बन जाऊंगी....
बार बार तुझे ये बताऊंगी...
कि यदि तू है, तो मैं तेरी पूरक हूँ...
तू दिशा है, तो मैं दिशा सूचक हूँ
तू विचार है तो मैं योजना हूँ...



किस्साGO - The StoryTeller
(Total: 15)
चलो आज एक कहानी कहते हैं...
न राजा की न रानी की...
तेरी मेरी जिंदगानी की
एक कहानी कहते हैं...



Books
(Total: 1)
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आवाज़ का आगाज़
(Total: 6)
kissa kriti gets a voice
(pilot phase)
Listen to your heart now........



शेर-ओ-शायरी
(Total: 17)
Saying a lot in few words....
(गागर में सागर)




New Arrived Krities


मन

आलोक पाण्डेय | (Reads 178)



मंगलस्वरूप

आलोक पाण्डेय | (Reads 124)



बसंत

Deep Chandra Pandey | (Reads 111)



सुआ बसन्ता

Om Fulara | (Reads 117)



मैं चित्रकूट का घाट तेरा

Sachin Om Gupta | (Reads 122)



शेर-ओ-शायरी


शहर

Yojna Jain | (Reads 865)

इतना धुआं इतना गुबार इन शहरों की किस्मत में है
इतना लालच, इतनी हवस शहर वालों की फितरत में है
बहुत मुश्किल है कि अब इसकी सीरत बदल जाए
गाँव तो शहर बन सकता है बेशक
पर बमुश्किल शहर कभी गाँव बन पाए



तुम बसंत बन आ जाओ

Yojna Jain | (Reads 747)

तुम बसंत बन आ जाओ मैं फ़ूल सी खिल जाऊँगी !
लहराओ बनके बादल मैं बारिश बन झर जाऊँगी!
सब लेना कुछ मत देना सिवा प्रीत के ऐ हमदम,
वरना बिन खिले, बिन झरे, बेमौसम मुर्झा मैं मर जाऊँगी !



औकात

Jyotsna Kalkal | (Reads 993)

***
माना कि सब मोहरे हैं तेरे
अ वक़्त,
बेशक तूने ही बिछाई बिसात,
छीन कर फ़िर लौटा सके मगर
किसी नन्हे की माँ,
इतनी तो
तेरी भी नहीं औकात

ज्योत्सना कलकल



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इमली का चटकारा

(Reads 1504)


चट चट चट..चटाके मारते मारते कंचन ने 1/2 किलो इमली अकेले ही चट कर दी
बित्ते भर की लड़की.....
आखिर कितनी खा लेगी, सोच के माँ ने छुपाया नहीं इमली का पूडा जब कंचन के पापा ने office से आके फ्रिज के ऊपर रखा....
सोचा

.....More



Author


Yojna Jain




Hindi (हिंदी)



रूह को ताकीद
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न जाने क्यों ?
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"प्रेम" की कविता
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"चाय" का एक प्याला
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लम्हा
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इमली का चटकारा
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हाँ, वो घर ‘घर’ लगता था
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The Cave
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'पखाँणों में नि जए'
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सुआ बसन्ता
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असोज
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