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कृति - कविता (Poems)
(Total: 103)
जिंदगी प्रश्‍न है यदि तू,
तो मैं उत्तर बन जाऊंगी....
बार बार तुझे ये बताऊंगी...
कि यदि तू है, तो मैं तेरी पूरक हूँ...
तू दिशा है, तो मैं दिशा सूचक हूँ
तू विचार है तो मैं योजना हूँ...



किस्साGO - The StoryTeller
(Total: 15)
चलो आज एक कहानी कहते हैं...
न राजा की न रानी की...
तेरी मेरी जिंदगानी की
एक कहानी कहते हैं...



Books
(Total: 1)
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आवाज़ का आगाज़
(Total: 6)
kissa kriti gets a voice
(pilot phase)
Listen to your heart now........



शेर-ओ-शायरी
(Total: 17)
Saying a lot in few words....
(गागर में सागर)




New Arrived Krities


मन

आलोक पाण्डेय | (Reads 178)



मंगलस्वरूप

आलोक पाण्डेय | (Reads 124)



बसंत

Deep Chandra Pandey | (Reads 111)



सुआ बसन्ता

Om Fulara | (Reads 117)



मैं चित्रकूट का घाट तेरा

Sachin Om Gupta | (Reads 122)



शेर-ओ-शायरी


प्यार के उजाले

Yojna Jain | (Reads 755)

बंद खिड़कियों के पीछे
प्यार के उजाले हैं
धीमे से फुसफुसा के देखो
हम तो कब से तुम्हारे हैं



मेरे एहसासो के अल्फाज

Sachin Om Gupta | (Reads 99)


जीवन की कहानी को नए पन्नों में लिखेंगे आज,
बीते हुए कल को भूलकर कुछ नया एहसास करेंगे आज
करेंगे वादा कुछ कर गुजरने का खुद से आज,
इस नव वर्ष को बना लेंगे अपना सा आज।

"नव वर्ष की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं"


ऐ चाँद कुछ ऐसा जतन कर दो,
न आए फिर अमावस की रात कभी,
वो सो जाया करे सब भूल के
न हो उनकी आंखें यूँ नम कभी ।


बलात्कार किसी महिला/युवती की चाहत नही होती,
और मौत आने की हर किसी व्यक्ति को आहट नहीं होती ।


वो मौत भी क्या दिलकश होगी साहब,
जिस मौत की वजह वो होगी ।



ये शाम भी न कमबख्त कितनी जल्दी आ गई,
अभी-अभी चाँद को देखा ही था, की तेरी याद आ गई ।



कब तक यूँ खड़े रहोगे सामने मेरे, ऊँचे पेड़ की तरह,
कभी तो बाहों में भरो हमें, झुकी हुई डाल की तरह ।




एक व्यक्ति होना यह जन्म की बात है,
वयस्क होना वह उम्र का मामला है
लेकिन एक प्रेमी, देखभाल करने वाला,
दोस्त होना यह आपकी पसंद का मामला है ।



तेरे इश्क़ ने इतना काफिर बना दिया,
कि तू ख़ुदा भी बन जाए तो तेरी रजा नहीं
"आभार- पीयूष रत्न "


तुम आए कुछ यूँ,
आज मौसम भी सोच में,
बादल भी मौज में
जैसे हो रही हो हवाओं से गुफ्तगूं ।



दोस्ती "सुबह की पहली ताजी हवा" सा एक एहसास है,
जिसे जताया नही, महसूस किया जाता है ।



आजकल हम भी शायरों की तरह शायरी करने लगे हैं,
क्योंकि लोंगो के लिए शायरी करना अब आदत सी बन चुकी है ।



मैं तुझे उस हर बिछौने की तस्वीर भेजूंगा,
जब-जब मैंने तुझे याद किया
बस आजकल हमने कार्बन को अपना बिछौना बना लिया है ।




मैं अपनी बंदगी ख़ुद से कर लूँ तो क्या कुछ बुरा है?
कहीं किसी कुलीन व्यक्ति से सुना था, तेरे भीतर ही ईश्वर है।


हमारी पृष्ठभूमि और परिस्थितियों से हम प्रभावित हो सकते हैं,
कि हम कौन हैं?
लेकिन हम उस व्यक्ति के लिए जिम्मेदार हैं जो हम बन जाते हैं।


जीवन में कभी-कभी उस इंसान से दूर हो जाना चाहिए,
जो आपके कार्य व पहचान की बात-बात पर तारीफ करता हो
क्योंकि वक्त के बदलाव के साथ वो इंसान खुशामदी भी कर सकता है ।


अकेलेपन में खुद का पता ढूढ़ रहा था,
बेहाल था, उस हाल में अपना सा कोई ढूढ़ रहा था ।


बचपन की वो शरारतें, कहाँ ग़ुम सी हो गई,
चलें थे हम सब साथ, वो यारियाँ कहाँ गुम सी हो गई ।


चित्रकूट! नदी किनारे टहलते हुए...
स्मशान में जलती चिता को देखकर मन ने आवाज की,
क्या इंसान सिर्फ मुठ्ठी भर राख होने के लिए जीवन जीता है ?



किसको बताएं बोझल दिन का दर्द,
हमसे तो अब रात भी मुँह फेर के सो गई ।



सारा आसमान रौशनी से जगमगा रहा है,
ऐसा लग रहा है, जैसे हजारों प्रेमी रौशनी लेकर खड़े हैं ।


रोज की सुबह अपने आप को पहचाने और अपने आप से कहें-
-मैं अपनी वास्तविकता खुद बनाता हूँ
-मैं हर व्यक्ति का आभारी हूँ
-मैं जीवन के बारे में सोचकर खुश और उत्साहित भी हूँ
-मैं स्वस्थ और ऊर्जा से भरा हूँ
-मैं अपने आप में विश्वास रखता हूँ कि मैं कौन हूँ?
-मैं अपने पास मन की शांति और खुशी रखता हूँ



सचिन....
तुम यूँ उदास क्यों बैठे हो?
बस यूँ ही जिंदगी की उलझनों में मुस्कान तलाश रहा हूँ ।


अब मुझमे इतनी बर्दाश्त करने की हिम्मत नहीं रही,
की तू मेरे साथ घड़ियां बिताए और मैं उसको तेरी मुहब्बत समझूँ ।


यूँ पलकों का भीग जाना जिंदगी है?
यूँ दिन का बोझल, रात ग़मों में गुजर जाना जिंदगी है?
यूँ सर्द मौसम में दिल का लगाना जिंदगी है?




जीवन में अगर आप ख़याली पुलाव पकाते हैं तो
वह बिना कार्रवाई का एक सपना है,
यदि बिना सोचे समझे आप कोई कार्य करते हैं,
तो वह एक बुरे सपने के जैसा है ।


जिंदगी एक जन्मदिन का केक है,
अपने हिस्से का टुकड़ा उठाते जाइये,और आगे बढ़ते रहिए ।


आज भी याद दिलाती हैं मुझे,
वो दिसंबर की सर्द हवाएं तुम्हारा वो सादगी भरा लहजा
जिसमें मैं तुम्हारी बाहों में आकर सिमट जाता था ।


आज वक्त उदास है मेरा,
मेरे महबूब तू मत उदास होना ।


तुमको है जब से देखा मेरी दुनिया ही बदल गई,
ख्वाबों ने लिया ऐसा रूप कि तुम मेरी बन गई ।


अक्सर जब हम नींद के आगोश में आते हैं,
हमें कुछ पुराने व बिखरे किस्से याद आते हैं ।






दुनिया का दस्तूर देखो लोगो के ऐब निकालने में कितने माहिर है,
जैसे कि खुद बड़े नेक चलनी के नवाब हों
अपनी सारी गलतियों कहते हैं,
भाई जमाना बड़ा खराब है ।


तू ये मत सोच की तेरे बगैर हमे नींद आ जाती है,
इन सर्द हवाओं में मैं और मेरी रजाई भी ठिठुरती है ।


जब आप सोचते हैं कि आप आगे नहीं जा सकते,
तो अपने आप को आगे बढ़ने के लिए बाध्य करें
आपकी सफलता दृढ़ता पर आधारित है, न कि भाग्य पर ।


उस अलबेली रात की बात न पूछो,
जिसमें हम सदियों से गुम जीवन जी गए
उस सुहागरात की बात न पूछो,
जिसमें हम एक-दूजे को पी गए ।


मेरे यारों कुछ तो बताओ मुझे उनकी ज़न्नत भरी बाँहों के बारे में,
सुना है जो भी सिमटता है मर ही जाता है।


ये हांथों में बनी लकीरें हैं तो हमारी बन्द मुठ्ठी में,
लेकिन हम इन्हें कैद नहीं कर सकते ।



शब्द जब दिल को छूने लगें तो वो शब्द नहीं रह जाते हैं,
एहसास बन जाते हैं ।


मुस्कान बिखेरती शक्ल और रंगों से भरे शब्दों की अगर आहट आ रही है,
तो यह मान लेना कि वहाँ कोई लेखक मौजूद है।


आप जानते हैं कि हर व्यक्ति के अंदर कोई एक व्यक्ति होता है,
जिसे आप नहीं जानते हैं ।


मैं तुझे उस वक्त भी तलाशता हूँ
जब मेरी आँखों मे "पलक" का पर्दा चढ़ा होता है,
मैं तुझे उस वक्त भी तलाशता हूँ
जब मेरी आँखों से "पलक" का पर्दा उठा होता है
मैं तुझे उस वक्त तक तलाशता रहूँगा,
जब तक मेरी आँखों मे हमेशा के लिए "पलक" का पर्दा चढ़ नही जाता है ।


कभी कोई अनजाने में आप से पूछ लें कि,
और क्या चल रहा है?
मुस्कुराते हुए कहिए सिर्फ सांसे चल रही हैं
हाल-चाल कहाँ कोई सुनता है






मेरे होंठों को तेरे होंठों से जुदा मत होने दे,
जी भर कर देख लेने दे तेरा ये सुलगता बदन
मैं तेरी और तू मेरी रूह में आ बस जाएं,
आज की रात मुझे तुझसे जुदा मत होने दे ।



जीवन को जीते ही नहीं रहना चाहिए
इसे उत्सव की तरह मनाया भी जाना चाहिए
||जन्मदिन की हार्दिक बधाई व् शुभकामनाए ||


क्यों त्याग करे नारी केवल क्यों नर दिखलाए झूठा बल
नारी जो जिद पर आ जाए, अबला से चंडी बन जाए ,
उस पर न करो अत्याचार तो सुखी रहेगा घर परिवार


गर किताबे बोलती होती तो,
दुनिया का हर इंसान विद्वान होता


आसूं मत बहाओ मेरे लिए,मत करो पश्चताप,
मैं मरा नहीं हूँ,
बस मैं समय से पहले जा रहा हूँ...


मेरी मुहब्बत ऐसे टूटी,
जैसे टूट गया हो माँ की दुआओं वाला ताबीज कोई
मेरे महबूब तू मुझसे ऐसे रूठा,
जैसे मर गया हो मनाने वाला कोई ।




धन्यवाद!
(सचिन ओम गुप्ता,चित्रकूट धाम)



































तहज़ीब

Yojna Jain | (Reads 766)

हर सुबह लिक्खि और शाम को
मिटायी जाती है ये तहज़ीब!

बदन पे सजायी और आँखों से
गँवाई जाती है ये तहज़ीब!

उतारिए अब चेहरों पे लगे हुए
नक़ाब जनाब ! क्योंकि अक्सर

काले दिल वालों के अंदाज़ों में,
ज़्यादा पायी जाती है ये तहज़ीब!!!




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इमली का चटकारा

(Reads 1504)


चट चट चट..चटाके मारते मारते कंचन ने 1/2 किलो इमली अकेले ही चट कर दी
बित्ते भर की लड़की.....
आखिर कितनी खा लेगी, सोच के माँ ने छुपाया नहीं इमली का पूडा जब कंचन के पापा ने office से आके फ्रिज के ऊपर रखा....
सोचा

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Author


Yojna Jain




Hindi (हिंदी)



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