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कृति - कविता (Poems)
(Total: 103)
जिंदगी प्रश्‍न है यदि तू,
तो मैं उत्तर बन जाऊंगी....
बार बार तुझे ये बताऊंगी...
कि यदि तू है, तो मैं तेरी पूरक हूँ...
तू दिशा है, तो मैं दिशा सूचक हूँ
तू विचार है तो मैं योजना हूँ...



किस्साGO - The StoryTeller
(Total: 15)
चलो आज एक कहानी कहते हैं...
न राजा की न रानी की...
तेरी मेरी जिंदगानी की
एक कहानी कहते हैं...



Books
(Total: 1)
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आवाज़ का आगाज़
(Total: 6)
kissa kriti gets a voice
(pilot phase)
Listen to your heart now........



शेर-ओ-शायरी
(Total: 17)
Saying a lot in few words....
(गागर में सागर)




New Arrived Krities


मन

आलोक पाण्डेय | (Reads 151)



मंगलस्वरूप

आलोक पाण्डेय | (Reads 101)



बसंत

Deep Chandra Pandey | (Reads 100)



सुआ बसन्ता

Om Fulara | (Reads 94)



मैं चित्रकूट का घाट तेरा

Sachin Om Gupta | (Reads 105)



शेर-ओ-शायरी


तहज़ीब

Yojna Jain | (Reads 744)

हर सुबह लिक्खि और शाम को
मिटायी जाती है ये तहज़ीब!

बदन पे सजायी और आँखों से
गँवाई जाती है ये तहज़ीब!

उतारिए अब चेहरों पे लगे हुए
नक़ाब जनाब ! क्योंकि अक्सर

काले दिल वालों के अंदाज़ों में,
ज़्यादा पायी जाती है ये तहज़ीब!!!




दुनिया में वही बातें चार

Yojna Jain | (Reads 861)

सात रंग बस इन्द्रधनुष के,
घुल मिल रंगें सारा संसार
दुनिया में वही बातें चार
बस कहने के अंदाज़ हज़ार.......




शहर

Yojna Jain | (Reads 848)

इतना धुआं इतना गुबार इन शहरों की किस्मत में है
इतना लालच, इतनी हवस शहर वालों की फितरत में है
बहुत मुश्किल है कि अब इसकी सीरत बदल जाए
गाँव तो शहर बन सकता है बेशक
पर बमुश्किल शहर कभी गाँव बन पाए



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इमली का चटकारा

(Reads 1482)


चट चट चट..चटाके मारते मारते कंचन ने 1/2 किलो इमली अकेले ही चट कर दी
बित्ते भर की लड़की.....
आखिर कितनी खा लेगी, सोच के माँ ने छुपाया नहीं इमली का पूडा जब कंचन के पापा ने office से आके फ्रिज के ऊपर रखा....
सोचा

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Author


Yojna Jain




Hindi (हिंदी)



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Himalayan Dooms Day: End of many stories
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Time
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