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कृति - कविता (Poems)
(Total: 103)
जिंदगी प्रश्‍न है यदि तू,
तो मैं उत्तर बन जाऊंगी....
बार बार तुझे ये बताऊंगी...
कि यदि तू है, तो मैं तेरी पूरक हूँ...
तू दिशा है, तो मैं दिशा सूचक हूँ
तू विचार है तो मैं योजना हूँ...



किस्साGO - The StoryTeller
(Total: 15)
चलो आज एक कहानी कहते हैं...
न राजा की न रानी की...
तेरी मेरी जिंदगानी की
एक कहानी कहते हैं...



Books
(Total: 1)
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आवाज़ का आगाज़
(Total: 6)
kissa kriti gets a voice
(pilot phase)
Listen to your heart now........



शेर-ओ-शायरी
(Total: 17)
Saying a lot in few words....
(गागर में सागर)




New Arrived Krities


मन

आलोक पाण्डेय | (Reads 194)



मंगलस्वरूप

आलोक पाण्डेय | (Reads 139)



बसंत

Deep Chandra Pandey | (Reads 118)



सुआ बसन्ता

Om Fulara | (Reads 138)



मैं चित्रकूट का घाट तेरा

Sachin Om Gupta | (Reads 138)



शेर-ओ-शायरी


कविता

Yojna Jain | (Reads 495)

कहते हैं लोग
क्या लगता है
कविता करने में
कैसे बनती है कविता
जवाब देने का प्रयास ....
बहुत घुलता है ये दिल
बेहद मचलता है ये दिल
पिसता है मसलता है
कभी दहकता कभी महकता
घिस घिस के तेज़ आँच में
तपता है ये दिल ....
तब कहीं जाकर, होकर गुलज़ार
कभी बेअदब, कभी बेख़याल
बारिश सी छनती है
मोम सी पिघलती है
फिसलती है संभलती है
और फिर बमुस्क़िल
रूह से काग़ज़ पे उतरती है!
करके मुझे मुझसे कहीं विशाल
मेरे अंदर बाहर तनती है।
जब मुझमें मैं नहीं होती
तब ये कविता बनती है ।



शहर

Yojna Jain | (Reads 880)

इतना धुआं इतना गुबार इन शहरों की किस्मत में है
इतना लालच, इतनी हवस शहर वालों की फितरत में है
बहुत मुश्किल है कि अब इसकी सीरत बदल जाए
गाँव तो शहर बन सकता है बेशक
पर बमुश्किल शहर कभी गाँव बन पाए



औकात

Jyotsna Kalkal | (Reads 1013)

***
माना कि सब मोहरे हैं तेरे
अ वक़्त,
बेशक तूने ही बिछाई बिसात,
छीन कर फ़िर लौटा सके मगर
किसी नन्हे की माँ,
इतनी तो
तेरी भी नहीं औकात

ज्योत्सना कलकल



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इमली का चटकारा

(Reads 1519)


चट चट चट..चटाके मारते मारते कंचन ने 1/2 किलो इमली अकेले ही चट कर दी
बित्ते भर की लड़की.....
आखिर कितनी खा लेगी, सोच के माँ ने छुपाया नहीं इमली का पूडा जब कंचन के पापा ने office से आके फ्रिज के ऊपर रखा....
सोचा

.....More



Author


Yojna Jain




Hindi (हिंदी)



ज़िन्दगी रिटर्न्स...
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"चाय" का एक प्याला
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काफ़िया-आली गैर मुरद्द्फ
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मन
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दिवाली का उजाला
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प्रेम
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बसंत
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कुछ
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"एक दिन" 🌹
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Himalayan Dooms Day: End of many stories
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Life
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The Cave
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NATURAL AFFECTION
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Time
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सुआ बसन्ता
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